पूर्व पालिकाध्यक्ष, शिक्षक व वकीलों समेत प्रबुद्ध नागरिक भी पहुंचे पुष्पांजलि करने
महोबा। पृथक बुंदेलखंड राज्य की मांग को लेकर पिछले 93 दिन से चल रहे अनशन में बैठे आंदोलनकारियों ने आज शहीद भगत सिंह का 111वां जन्मदिन मनाया। अनशन स्थल पर उनकी तस्वीर सजायी गयी और पुष्पांजलि अर्पित की गयी। पूर्व नगरपालिकाध्यक्ष बती बाबू और जिला अधिवक्ता समिति के महामंत्री चंद्रशेखर स्वर्णकार समेत तमाम वकील व सेवानिवृत्त शिक्षकों ने भी अनशन स्थल पहुंच कर युवाओं के प्रेरणास्त्रोत भगत सिंह को पुष्प सुमन अर्पित किए।
इस मौके पर बती बाबू ने कहा कि मात्र 23 वर्ष की उम्र में भगत सिंह ने अंग्रेजी हुकूमत को हिलाकर रख दिया था। उनको फांसी 24 मार्च, 1931 को होना थी लेकिन उनको मिल रहे भारी जन समर्थन को देखकर अंग्रेज भी उनसे इतना डर गये थे कि फांसी एक दिन पहले दे दी। जिला अधिवक्ता समिति के महामंत्री चंद्रशेखर ने बताया कि भगत सिंह के चाचा अजीत सिंह भी स्वतंत्रता सेनानी थे, आजादी की लड़ाई में वे उन्हीं से प्रेरित होकर कूदे थे। आल्हा चौक पर पिछले 92 दिन से लगातार अनशन पर बैठे जिला अधिवक्ता समिति के पूर्व अध्यक्ष सुखनंदन सिंह यादव ने कहा कि उनके पिता किशन सिंह उनकी शादी कराना चाहते थे लेकिन भगत सिंह ने ये कहकर शादी करने से इंकार कर दिया था कि देश की आजादी से पहले मेरी शादी सिर्फ मौत से होगी और किसी से नहीं।हमारे साथी व बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर ने भी शादी न करने का संकल्प ले रखा है। बुंदेलखंड की बीमार स्वास्थ्य सेवाओं को ठीक कराने के लिए वे जूते चप्पल त्याग कर तीन साल से नंगे पैर चल रहे हैं। तारा पाटकर ने कहा कि भगत सिंह भी अपनी मांगों को लेकर अनशन करते थे। जेल में भारतीय कैदियों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार व भेदभाव के खिलाफ उन्होंने पांच महीने तक अनशन किया था। शुरू में वे महात्मा गांधी से बहुत प्रभावित थे लेकिन बाद में अलग राह पर चल दिए थे। अनशन स्थल पर आज दिन भर लोग आते रहे और भगत सिंह को नमन करते रहे। इनमें राम प्रकाश दीक्षित, लालजी त्रिपाठी, भागीरथ शर्मा, लालता सक्सेना, राज कुमार राठौर, आशीष शुक्ला, अशोक पाटकार, अमर चंद विश्वकर्मा आदि शामिल रहे।
क्राइम18न्यूज महोबा से कुलदीप मिश्रा।
महोबा। पृथक बुंदेलखंड राज्य की मांग को लेकर पिछले 93 दिन से चल रहे अनशन में बैठे आंदोलनकारियों ने आज शहीद भगत सिंह का 111वां जन्मदिन मनाया। अनशन स्थल पर उनकी तस्वीर सजायी गयी और पुष्पांजलि अर्पित की गयी। पूर्व नगरपालिकाध्यक्ष बती बाबू और जिला अधिवक्ता समिति के महामंत्री चंद्रशेखर स्वर्णकार समेत तमाम वकील व सेवानिवृत्त शिक्षकों ने भी अनशन स्थल पहुंच कर युवाओं के प्रेरणास्त्रोत भगत सिंह को पुष्प सुमन अर्पित किए।
इस मौके पर बती बाबू ने कहा कि मात्र 23 वर्ष की उम्र में भगत सिंह ने अंग्रेजी हुकूमत को हिलाकर रख दिया था। उनको फांसी 24 मार्च, 1931 को होना थी लेकिन उनको मिल रहे भारी जन समर्थन को देखकर अंग्रेज भी उनसे इतना डर गये थे कि फांसी एक दिन पहले दे दी। जिला अधिवक्ता समिति के महामंत्री चंद्रशेखर ने बताया कि भगत सिंह के चाचा अजीत सिंह भी स्वतंत्रता सेनानी थे, आजादी की लड़ाई में वे उन्हीं से प्रेरित होकर कूदे थे। आल्हा चौक पर पिछले 92 दिन से लगातार अनशन पर बैठे जिला अधिवक्ता समिति के पूर्व अध्यक्ष सुखनंदन सिंह यादव ने कहा कि उनके पिता किशन सिंह उनकी शादी कराना चाहते थे लेकिन भगत सिंह ने ये कहकर शादी करने से इंकार कर दिया था कि देश की आजादी से पहले मेरी शादी सिर्फ मौत से होगी और किसी से नहीं।हमारे साथी व बुंदेली समाज के संयोजक तारा पाटकर ने भी शादी न करने का संकल्प ले रखा है। बुंदेलखंड की बीमार स्वास्थ्य सेवाओं को ठीक कराने के लिए वे जूते चप्पल त्याग कर तीन साल से नंगे पैर चल रहे हैं। तारा पाटकर ने कहा कि भगत सिंह भी अपनी मांगों को लेकर अनशन करते थे। जेल में भारतीय कैदियों के साथ हो रहे दुर्व्यवहार व भेदभाव के खिलाफ उन्होंने पांच महीने तक अनशन किया था। शुरू में वे महात्मा गांधी से बहुत प्रभावित थे लेकिन बाद में अलग राह पर चल दिए थे। अनशन स्थल पर आज दिन भर लोग आते रहे और भगत सिंह को नमन करते रहे। इनमें राम प्रकाश दीक्षित, लालजी त्रिपाठी, भागीरथ शर्मा, लालता सक्सेना, राज कुमार राठौर, आशीष शुक्ला, अशोक पाटकार, अमर चंद विश्वकर्मा आदि शामिल रहे।
क्राइम18न्यूज महोबा से कुलदीप मिश्रा।



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