कन्नौज से विमलेश कुशवाहा की खास रिपोर्ट


नदसिया स्थित बाबा नागेश्वर नाथ शिव मन्दिर सावन के दूसरे सोमवार को ऊं नमःशिवाय की आवाज से गूंज उठा। इस मंदिर का ‘प्राकृतिक’ शिव लिंग प्रमुख आकर्षण है।आप को बतादे की मन्दिर की सौंदर्यता श्रावण मास में स्वर्ग के समान हो जाती है ! इतना ही नही मन्दिर के गुम्बद पर लगा गगन चुम्बी कलश व त्रशूल प्रातः कालीन बेला में सूर्य की पहली किरण पडते ही स्वर्ण के समान दमक उठता है। पूर्वजों की माने तो मंन्दिर में अति प्राचीन स्थापित शिव लिंग काशी विश्व नाथ की शिव लिंग से मैच करती है। चूना एवं डाट अथवा ककहिया ईट से निर्मित बाबा नागेश्वर नाथ का शिव मंन्दिर राजा रियासत व प्राचीन कला कौशल को दर्शाता है । मंन्दिर के बाहरी एवं अन्दर की दीवारो पर बनी आकृतिया आज भी अपनी प्राचीनता को तरोताजा करती है। मन्दिर में भगवान शिव की पूजा आराधना करने बाले संतों के मुताविक मन्दिर तकरीवन 500 सौ बर्ष से भी पुराना बताया जा रहा है ।साथ ही संतो की माने तो श्रावण मास एवं नाग पचमी को मंदिर के चारो तरफ काले नाग का अदृष्य पहरा रहता है। जो जब कभी दिखाई पडता है मंदिर के मुख्य द्वार के सम्मुख बना विशाल काय चहुमुखी यज्ञ शाला व मंन्दिर परिषर में लगी फुलबारी अतिशोभायमान प्रतीत होती है। इस चहुमुखी यज्ञशाला में हवन पूजन आदि के लिए जगत गुरु शंकराचार्य ,करपात्री जी महाराज जैसे महान सतों ने प्रतिभाग किया था । मंदिर का मुख्य जुणाव जीटी रोड से सात किलो मीटर तिर्वा रोड पर है इसके समीप बसे मुख्य नगर एवं शहर कन्नौज ,जलालाबाद ,जसोदा ,गुरसहायगंज ,छिबरामऊ ,तालग्राम ब तिर्बा है।
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