जौनपुर की जनता हिसाब चाहती है ।



जौनपुर (उत्तर प्रदेश ) पिछले दिनों जौनपुर के प्रतिष्ठित अस्पताल ईशा हॉस्पिटल के मालिक जाने माने डॉ रजनीश श्रीवास्तव से दो करोड़ रंगदारी मांगने का मामला प्रकाश में आया तो जनपद ही नही बल्कि पूरे पूर्वांचल में तहलका मच गया ।प्रशासन के भी हाथ पांव फूल गए।पुलिस प्रशासन सक्रिय हुआ तो सप्ताह भर के अंदर ही इस मामले
से जुड़े सभी अपराधी रंगदारी में दी गयी पचास लाख की रकम के साथ दो खेप में पकड़े गये ।पुलिस कप्तान के के चौधरी और उनकी टीम को जनपद के हर लोगों ने खुले मन से साधुवाद और धन्यवाद दिया कि फन उठा रहे सपोलों का सिर समय रहते पुलिस ने कूँच कर
उन्हें उनके अंजाम तक पहुंचा दिया।इस घटनाक्रम के पर्दाफाश का सबसे महत्वपूर्ण पहलू यह रहा कि रंगदारी में डॉ रजनीश श्रीवास्तव द्वारा दी
गयी वह रकम पकड़ में आयी जिस पर डॉ ने अपने हॉस्पिटल की मुहर लगायी थी ।पचास लाख की रकम एक आम आदमी के लिए तो सपना ही होता है ।आम जनता डॉ रजनीश श्रीवास्तव , पुलिस प्रशासन से सिर्फ इतना जानना चाहती है कि जो रकम डॉ द्वारा अपराधियों को दी 
गयीं ,उसका लेखा जोखा अस्पताल के रिकार्ड में दर्ज है कि नही ।यदि दर्ज है तो क्या सरकार को इतनी बड़ी रकम का टैक्स अदा किया गया है ।प्रश्न गहरा इस लिए हो जाता है कि इतनी बड़ी रकम पकड़े जाने के बाद पुलिस या आय कर विभाग का अभी तक कोई अधिकृत बयान पकड़ी गयी रकम को लेकर नही आया कि वह सफेद धन है या ......
यदि सफेद धन है तो उसका टैक्स सरकार को अदा कर दिया गया है।
अभी तक इस तरह का कोई बयान न आना पुलिस और आय कर विभाग पर प्रश्न चिन्ह खड़ा कर रहा है ।जनपद के हर बुद्धजीवी  विशेष
कर मीडिया और पुलिस वालों को याद दिलाना चाहता हूं कि लगभग तीन चार माह पहले बरसठी थानान्तर्गत मियाचक के एक स्वर्ण व्यवसायी से शाम के समय घर आते समय लगभग साढ़े छः और सात के बीच मे मियाचक और निगोह के बीच हंसिया गांव के पास बाइक सवार बदमासो ने आभूषण और नकदी सहित लगभग पंद्रह लाख की छिनैती किया था ।स्वर्ण व्यवसायी ने अपने लिखित तहरीर में भी
नगदी और आभूषण को मिलाकर पंद्रह लाख लूट की शिकायत किया था ।किंतु बरसठी और जनपद की पुलिस उससे आभूषण की पक्की
रकम की मांग करने लगी जो उसके पास नही थी और पन्द्रह लाख का मामला पुलिसिया के कारस्तानी में भेंट चढ़ गया ।क्योंकि पुलिस के अनुसार वह ब्लैक मनी था ।किन्तु इस मामले में तो स्थिति बिल्कुल 
शीशे की तरह साफ है ।डॉ द्वारा रंगदारी में दिए गए रुपये को बदमासों
से पुलिस बरामद भी कर चुकी है ।अब पुलिस कप्तान की यह नैतिक
जिम्मेदारी बनती है कि वह पूरी छान बीन कर अपने जनपद की जनता को यह बताये की डॉ द्वारा बदमासों को दिया गया पचास लाख रुपया 
सफेद है या काला ।यदि सफेद है तो सो फार सो सो गुड़ ।आय कर विभाग भी प्रमाण सहित जनता के सामने मीडिया के माध्यम से अपना बयान जारी करे और नही है तो उस धन को लेकर आयकर विभाग और पुलिस विभाग द्वारा क्या कार्यवाही की जा रही है यह बतायें।क्योकि अन्यथा की स्थिति में ये आर्थिक अपराध की श्रेणी में आता है ।नियम और कानून आम और खास सब के लिए एक है। वाजिब प्रश्न का उत्तर तो मिलना ही चाहिए।।        




 *संदीप कुमार सिंह ब्यूरो जौनपुर*
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